महाशक्ति
सिद्ध पीठ पुण्य सलिला कल_कल
निनाद करती पाप विनाशिनी माँ भगीरथी(
गंगा ) के
पावन तट पर तीर्थराज शुक्रताल मे स्थापित है,
मनमोहक,
शान्त प्रकृति माँ का आंचल है। यह वही पावन तीर्थ है जहाँ पर
भारत शिरोमणि राजा परिक्षत को तक्षक के काटने पर पूर्ण
आर्यावर्त की गोष्ठि होकर महान योगी तपः पूत महर्षि शुकदेव जी
के द्वारा आत्मज्ञान कराया गया,
भागवत कथा की उदगम स्थली व आत्मज्ञान प्राप्त करा कर मुक्ति
प्रदाता यही महान तपस्थली है।सम्पूर्ण ऋषियों ने इसी स्थान को
इस परम पवित्र कार्य हेतु क्यों चुना?
महाशक्ति सिद्ध पीठ के महान तपस्वी
संरक्षक प्रातः वन्दनीय श्री प्रकाशानन्द जी जो सन् ८४ से
समाधिस्थ योगी है। समाधि अवस्था मे सिद्ध ऋषियों के
स्पष्टीकरण व दर्शन से देखने व श्रवण के उपरान्त बताते है कि
जितना महान कार्य सम्पादन करना होता है,
वैसी ही परमाणु युक्त भूमि का होना
परमावश्यक है।यह वही महान पावन भूमि है जहाँ पर सतयुग के
प्रांगण मे असंभव संभव हुआ। महा बडभागी महाराजा श्री अश्वपति
की पवित्र कन्या सावित्री के द्वारा यमराज को परास्त कर अपने
पति का जीवन, खोया हुआ राज्य व
सम्पूर्ण सुख, ऐश्वर्य व
आत्मज्ञान भी इसी स्थान पर प्राप्त हुआ था।यमराज को परास्त कर
वरदान प्राप्ति का यह एक मात्र उदाहरण है।अतः इस पुनीत स्थान
पर जो विश्व मे नितान्त दुर्लभ है जो प्राणी यहाँ आकर पवित्र
ह्रदय से जप,तप,यज्ञ,दान
इत्यादि करता है तथा श्रीमद॒ भागवत का पारायण कराता है,उसको
अर्थ,धर्म,काम,मोक्ष
चारो पदार्थो की प्राप्ति होती है। यह ध्रुव सत्य है
अति विशेष
संकट मोचन श्री बालाजी भगवान के
आदेशानुसार श्री बालाजी योगधाम की स्थापना उसी पवित्र तप स्थली
पर हो रही है जहाँ पर महान सती सावित्री को वरदान प्राप्त हुआ
था। जो भी महान भाग्यशाली मानव इस पुनीत स्थान पर इस पवित्र
यज्ञ मे आहुति देगा,उसकी सम्पूर्ण मनोकामनाओं की पूर्ति
होगी,ऐसा बालाजी भगवान का आदेश है।क्योकि यह संकट मोचन श्री
बालाजी योगधाम महावीर बजरंग बली जी के उस विज्ञानी आलौकिक
स्वरुप का दिग्दर्शन कराने का मार्ग प्रशस्त करेगा जो विश्व
में अन्यत्र कहीं नही है।